, April 22 -- कुलपति ने पीपीटी के माध्यम से विश्वविद्यालय के क्रियाकलापों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यहां 24 विषयों में स्नातकोत्तर एवं पीएचडी कराए जाते हैं। यहां के 26 कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई हो रही है। 201 एकड़ परिसर में फैला हुआ यह विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों में 362 शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसे पीएम उषा के मेरू के अंतर्गत शोध विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है। बिहार में समर्थ पोर्टल एवं डिजी लॉकर की शुरुआत करने में यह विश्वविद्यालय राज्य में प्रथम है। खेल के क्षेत्र में भी यह विश्वविद्यालय काफी आगे है। यहां का एडवांस्ड रिसर्च सेन्टर, केन्द्रीय पुस्तकालय काफी समृद्ध है, जबकि राज पुस्तकालय में दुर्लभ पुस्तकें उपलब्ध हैं। पारंपरिक विश्वविद्यालयों में हमारा विश्वविद्यालय नैक द्वारा उच्च स्कोर- बी प्लस प्लस प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पांच दिवसीय सम्मेलन आयोजक विभाग तथा विश्वविद्यालय के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। डॉ. निर्मला कुशवाह ने सम्मेलन के विषय वस्तु को रखते हुए व्यवसायिक अनुसंधान के महत्त्वों एवं उसकी समाज में उपयोगिता की चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शोध को बढ़ावा देता है, जिसका उपयोग समाज की बेहतरीन के लिए हो सकता है।

इंडियन कॉमर्स एसोशिएशन के वाइस प्रेसिडेंट एवं गेस्ट ऑफ़ ओनर प्रो. एन. के. झा ने कहा कि आज शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका बदल रही है। एनआइपी- 2020 पूरे शैक्षणिक वातावरण को परिवर्तित कर रहा है। शोध विश्व में परिवर्तन की क्षमता रखता है। इस पांच दिवसीय सम्मेलन से शोधार्थियों एवं समाज को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने सम्मेलन के विषय को बहुआयामी एवं विस्तृत बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने से समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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