, Aug. 24 -- शोध प्रकाशन एवं अनुभव की गणना भी एपीआई के स्कोर में की जायेगी, लेकिन शोध प्रकाशन एवं अनुभव को भलीभाँति परिभाषित किया जायेगा, जिससे इसमें किसी भी प्रकार का संशय न रहें एवं इसका कोई गलत फायदा नहीं उठा सके।इस बात पर भी सहमति के लिए वार्ता हुई कि अतिथि सहायक प्राध्यापकों को भी वर्तमान में बहाल हुये संविदा सहायक प्राध्यापकों की ही भाँति न्यूनतम वेतनमान एवं उस पर महंगाई भत्ता दिया जाये। उनके नवीकरण की प्रक्रिया सभी विश्वविद्यालयों में एक समान रखी जाये। अतिथि सहायक प्राध्यापकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र तथा शोध पत्र एवं अनुभव की भली भाँति जाँच कर ली जाये तदोपरांत उन्हें 65 वर्षों तक कार्य करने का मौका दिया जाये।

वार्ता के दौरान अनशनकारी छात्रों के इस सुझाव पर भी विचार किया गया कि अधिकतम उम्र सीमा को एक बार में नहीं घटाकर उसे धीरे-धीरे कम किया जाये एवं इस बीच सहायक प्राध्यापकों की बहाली नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष रिक्तियों के विरूद्ध किया जाये।

अनशनकारी छात्रों की ओर प्रतिनिधिमंडल में एम.एल.सी. (शिक्षक प्रतिनिधि) जीवन कुमार, सहायक प्राध्यापक (अतिथि) डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. उमेश कुमार, सहायक प्राध्यापक (अतिथि) डॉ. विभा रानी तथा शोध छात्र आशीष कुमार एवं श्री मोनू कुमार राय उपस्थित थे।

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