पटना , अक्टूबर 27 -- िहार के गांवों में अब पशुओं की सेहत सुधारने और पशुपालकों की आय बढ़ाने की जिम्मेदारी जीविका दीदियां बखूबी निभा रही हैं। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज प्रशिक्षित 'पशु सखी' बनकर पशुओं की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं की उपलब्धता और पोषण संबंधी सलाह के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, स्वरोजगार और पशुधन संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 8,992 प्रशिक्षित पशु सखियां अपनी सेवाएं दे रही हैं। जिलेवार आंकड़ों में गया में सर्वाधिक 540 पशु सखियां मौजूद हैं। मुजफ्फरपुर में 443 और कटिहार में 432 पशु सखियां कार्यरत हैं। नवादा और पूर्णिया में 430-430, जबकि नालंदा में 424 प्रशिक्षित पशु सखियां पशुपालकों को सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
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