पटना , जुलाई 29 -- बिहार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम ने बुधवार को कहा कि बिहार में सहकारिता आधारित मात्स्यिकी विकास एवं मत्स्य निर्यात की अपार संभावना है और इससे प्रदेश में बेरोजगारी कम करने के साथ पलायन रोकने में मदद मिलेगी।
श्री राम ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उनका विभाग सहकारिता विभाग के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार है।
बिहार में सहकारिता आधारित मात्स्यिकी विकास एवं मत्स्य निर्यात की संभावना विषय पर आज बामेती सभागार में एक कार्यशाला-सह-संगोष्ठी का आयोजन क्या गया, जिसमे नंदकिशोर राम के साथ सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव भी शामिल हुए।
इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (एनसीडीसी) एवं मत्स्य निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन कहा कि सिवान में उनका विभाग वेटलैंड क्लस्टर बनाकर चौर विकास करने जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि एवं विकास बैंक (नाबार्ड) से 195 करोड़ की प्राप्ति हुई है। उन्होंने कहा कि इसी तरह की योजना बाद में छपरा, मधुबनी और मोतिहारी में शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि छपरा में झींगा पालन की योजना बनाई गई है।
मंत्री श्री राम ने कहा कि भारत में सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का सशक्त माध्यम है। देश के विकास का जो सपना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देखा है, उसे सहकारिता के सहयोग से डेयरी, मत्स्य, पशु संसाधन विभाग साकार करेगा। उन्होंने कहा कि उनका विभाग गांवों की गलियों तक इन योजनाओं को पहुंचा कर मछली पालन को कृषि क्षेत्र के सबसे तेजी से विकसित होने वाले करोबार में शामिल करना चाहता है। उन्होंने कहा कि योजना के अनुसार बिहार मत्स्य पालन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ मछलियां देश के दूसरे प्रदेशों तक पहुंचाने के मिशन पर कार्य कर रहा है।
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