पटना , जून 19 -- खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव दीपक आनंद की अध्यक्षता में शुक्रवार को विभागीय सभाकक्ष में बिहार राज्य के लिए संपीड़ित बायो गैस (सीबीजी) नीति के निर्माण के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर विकास एवं आवास, कृषि, पशु एवं मत्स्य संसाधन, उद्योग एवं पंचायती राज के नामित नोडल पदाधिकारियों के साथ-साथ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ,भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए राज्य सीबीजी नीति के मॉडल ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न विभागों द्वारा राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, गोबर, जैविक अपशिष्ट, शहरी ठोस अपशिष्ट तथा अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए गए। साथ ही सीबीजी संयंत्रों की स्थापना, भूमि उपलब्धता, निवेश प्रोत्साहन, पर्यावरणीय स्वीकृतियां, परिवहन एवं विपणन व्यवस्था सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
संपीड़ित बायो गैस उत्पादन को बढ़ावा देने से राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा, किसानों एवं पशुपालकों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त होगा तथा कृषि एवं शहरी अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विभाग से संबंधित सुझाव एवं आवश्यक जानकारियां शीघ्र उपलब्ध कराएं ताकि बिहार राज्य के लिए एक व्यावहारिक, निवेश-अनुकूल एवं भविष्य उन्मुख सीबीजी नीति का प्रारूप तैयार किया जा सके।
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्राप्त सुझावों एवं भारत सरकार के मॉडल ड्राफ्ट के आधार पर राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नीति का मसौदा तैयार कर शीघ्र ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बिहार सरकार राज्य में हरित ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सीबीजी नीति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
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