नयी दिल्ली , अप्रैल 23 -- केंद्र सरकार ने 'पीएम-आशा' योजना के अंतर्गत खरीद कार्यों का विस्तार करते हुए छत्तीसगढ़ और बिहार में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
छत्तीसगढ़ में जहां खरीद परिचालन 12,000 टन के पार पहुंच गया है, वहीं आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत बिहार में पहली बार संगठित तरीके से दलहन खरीद शुरू की गई है।
यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी है। इसमें बताया गया है कि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) ने बिहार में पहली बार दलहन मसूर की संगठित खरीद शुरू की है। यह पहल वैज्ञानिक भंडारण के लिए केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के सहयोग से संचालित की जा रही है।
गत 22 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 32,000 टन मसूर खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत अब तक 100.4 टन की खरीद पूरी हो चुकी है। राज्य में 16 पीएसीएस/एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं और नेफेड भी अपने नेटवर्क के माध्यम से संचालन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
छत्तीसगढ़ में 'ई-संयुक्ति' पोर्टल और डिजिटल भागीदारी के कारण खरीद प्रक्रिया में काफी तेजी आई है। वर्तमान में राज्य के धमतरी, दुर्ग, रायपुर और रायगढ़ सहित कई जिलों में 85 पैक्स केंद्रों के माध्यम से खरीद चल रही है।
गत 22 अप्रैल तक एनसीसीएफ ने चने की 9,032 टन और मसूर की 7.98 टन खरीद पूरी कर ली है, जिससे 6,150 से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। नेफेड ने राज्य में 137 केंद्र खोले हैं। अब तक नेफेड ने 3,850 टन चना और 109 टन मसूर की खरीद की जा चुकी है, जिससे करीब 2,926 किसानों को लाभ पहुँचा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित