पटना , अक्टूबर 07 -- बिहार सरकार ने कृषि क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए आठ करोड़ रुपये स्वीकृत करते हुए 9,840 किसानों और युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया है, जिससे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को कहा कि कृषि को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए किसानों के साथ युवाओं को आधुनिक तकनीक और आवश्यक कौशल से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि बिहार के युवा कृषि में रोजगार तलाशने के साथ रोजगार देने वाले भी बनें।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य योजना मद से स्वीकृत राशि से क्षेत्र विशेष के कौशल प्रशिक्षण और पूर्व अर्जित कौशल की पहचान एवं प्रमाणन के माध्यम से कुल 9,840 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों और कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से 328 प्रशिक्षण समूह संचालित किए जाएंगे।
श्री सिन्हा ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण युवा अपने अनुभव के आधार पर कृषि एवं कृषि से जुड़ी गतिविधियों में काम कर रहे हैं, लेकिन उनके कौशल का औपचारिक प्रमाणन नहीं हो पाता है। पूर्व अर्जित कौशल की पहचान एवं प्रमाणन के माध्यम से उनके अनुभव और दक्षता को मान्यता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान पौधशाला प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, मशरूम उत्पादन, केंचुआ खाद निर्माण, मधुमक्खी पालन, कृषि उद्यमिता और कृषि यंत्रों के उपयोग सहित विभिन्न कृषि गतिविधियों में तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के साथ उन्हें कृषि आधारित रोजगार और स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है।
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रशिक्षण का संचालन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, कृषि एवं उद्यान महाविद्यालयों, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों, कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, बामेती तथा 38 आत्मा जिलों के माध्यम से किया जाएगा। पूर्व अर्जित कौशल की पहचान एवं प्रमाणन के लिए बिहार कौशल विकास मिशन के अंतर्गत पंजीकृत कौशल विकास केंद्रों की भी सहभागिता होगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित