पटना , अक्टूबर 28 -- बिहार मंत्रिमंडल ने राज्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सुशासन, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पॉलिसी-2026 के निर्धारण को मंजूरी दी है।
इसके साथ ही मुजफ्फरपुर जिले में बंद पड़ी मोतीपुर चीनी मिल की जमीन पर चीनी मिल और अन्य उद्योगों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। राज्य में सड़क, हवाई संपर्क, तकनीकी शिक्षा, डिजिटल सेवाओं, न्यायिक व्यवस्था और बाढ़ प्रबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
मंत्रिमंडल सचिवालय में अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने आज संवाददाताओं को बताया कि एआई नीति के तहत राज्य में एआई कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), स्टार्टअप और डिजिटल उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज अनुदान, क्लाउड एवं कंप्यूटिंग सुविधाओं के उपयोग पर प्रोत्साहन, लीज रेंटल सब्सिडी, बिजली शुल्क में सब्सिडी, रोजगार सृजन सब्सिडी और एसजीएसटी प्रतिपूर्ति जैसे वित्तीय प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया जाएगा।
इस नीति के तहत कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण और शहरी सेवाओं में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ एआई इनोवेशन हब, डेटा प्लेटफॉर्म, आईटी पार्क और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य निवेश आकर्षित करने, कुशल मानव संसाधन तैयार करने और उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ राज्य में एआई आधारित मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
मंत्रिमंडल ने बिहार राज्य चीनी निगम की बंद इकाई मोतीपुर चीनी मिल की कुल 266 एकड़ भूमि में से 115.08 एकड़ पर चीनी मिल स्थापित करने तथा शेष 151.58 एकड़ भूमि उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने की स्वीकृति दी है। इस जमीन का उपयोग सात निश्चय-3 के तहत 'समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार' के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
मोतीपुर की उपलब्ध औद्योगिक भूमि पर नई इकाइयों की स्थापना से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
श्री चौधरी ने बताया कि पथ निर्माण विभाग के प्रस्तावों के तहत विश्वामित्र पथ यानी बक्सर-आरा-मनेर गंगा पथ के निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), भूमि अधिग्रहण तथा आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए परामर्शी सेवाओं पर 2.60 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस पथ की लंबाई 90 किलोमीटर है।
इसी तरह, गोपालगंज में दरिहारा (कोन्हुआ)-डुमरिया घाट के बीच 73.51 किलोमीटर लंबे नारायणी पथ के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने, भूमि अधिग्रहण और आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने से संबंधित परामर्शी सेवाओं के लिए 2.10 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना को बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से पीपीपी की डीबीएफओटी-टोल पद्धति पर क्रियान्वित कराया जाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित