, April 11 -- अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि महान समाज सुधारक, शिक्षाविद और विचारक ज्योतिराव फुले अपने पूरे जीवन को सामाजिक समानता, शिक्षा के प्रसार और जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष के लिए सदैव समर्पित रहे। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों, विशेषकर महिलाओं और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े समुदायों के उत्थान के लिए ऐतिहासिक काम किए। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज में परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने महिला शिक्षा की शुरुआत कर समाज में नई चेतना जगाई और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई। आज उनके विचार हमें एक समान, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं। उनके आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मिथिला विश्ववविद्यालय के उप-परीक्षा नियंत्रक (तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा) सह विभागीय वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि आज के समय में, जब सामाजिक समरसता और समान अवसर की बात हो रही है, तब ज्योतिराव फुले के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम एक सशक्त और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं। ज्योतिबा फुले के विचार को अपनाकर भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सकता है।

विभागीय वरीय सहायक प्राध्यापिका डॉ. नीतू कुमारी ने कहा कि सामाजिक समरसता और न्यायपूर्ण समतामूलक समाज के साथ-साथ फुले ने महिला शिक्षा पर भी बहुत जोर दिया और मिसाल पेश की। उनका मानना था कि आधी आबादियों को शिक्षित कर और उन्हें रोजगार के अवसर से जोड़कर ही देश को समृद्धि के रास्ते पर ले जाया जा सकता है।उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा परिवर्तन साहस, संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण से ही संभव है।

मंच संचालन शोधार्थी रिक्की गणेश कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी कंचन कुमारी ने किया। इस मौके पर कई शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्रा उपस्थित थे।

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