, March 27 -- वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग तीन लाख मिट्टी नमूनों की जांच की गई है। प्रयोगशाला में मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है। इस कार्ड में अंकित रहता है कि मिट्टी में कौन सा पोषक तत्व कितनी मात्रा में है और धान, गेहूं, आलू आदि फसलों के लिए किस उर्वरक को कितनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए। राज्य में किसानों को तीन वर्ष के अंतराल पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जाते हैं।

अब मृदा स्वास्थ्य कार्ड वॉट्सऐप के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपलब्ध ऑनलाइन सॉयल हेल्थ कार्ड में लगभग 106 फसलों के लिए अनुशंसाएं दर्ज होती हैं।

किसानों को स्थानीय स्तर पर आसान मिट्टी जांच सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अनुमंडल स्तर पर 32 नई मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। वर्तमान में राज्य में 38 जिला स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं, नौ चलंत (मोबाइल) प्रयोगशालाएं और 14 अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त मिट्टी जांच की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए तीन रेफरल प्रयोगशालाएं भी संचालित हो रही हैं।

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