, May 3 -- जांच की गुणवत्ता के अनुश्रवण के लिए केंद्रीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला के अतिरिक्त, राज्य में स्थित दोनों कृषि विश्वविद्यालयों की मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं को रेफरल प्रयोगशाला के रूप में अधिसूचित किया गया है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज है, जिसके माध्यम से उन्हें उनके खेत की मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की सटीक जानकारी दी जाती है। जांच परिणामों के आधार पर किसानों को उनके खेत के रकबे एवं फसल के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग की अनुशंसा की जाती है, जिससे अनावश्यक और अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी आती है।
रासायनिक उर्वरकों के स्मार्ट उपयोग से जहां फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर गैर-जरूरी उपयोग कम होने से कृषि लागत में भी कमी आ रही है। इससे किसानों की आय बढ़ रही है और उनमें खुशहाली आ रही है। यह पहल राज्य में कृषि क्षेत्र में एक मौन क्रांति का कार्य कर रही है।
राज्य सरकार की सभी मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं में 12 पैरामीटर पर मृदा नमूनों का विश्लेषण किया जाता है। नमूना लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सॉफ्टवेयर आधारित संग्रहण प्रणाली अपनाई गई है। कृषि विभाग के कर्मी खेत पर जाकर किसान के प्लॉट का फोटो, अक्षांश एवं देशांतर के साथ पूरा विवरण ऐप पर अपलोड करते हैं।
मिट्टी नमूनों की जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने में लगने वाले समय को कम करने के उद्देश्य से उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। ऑनलाइन उपलब्ध इस कार्ड में लगभग 106 फसलों के लिए अनुशंसाएं दर्ज होती हैं। मिट्टी जांच की वैधता तीन वर्ष की होती है।
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