, March 14 -- डॉ. अमिर अली खान ने कहा कि महिला विकास सिर्फ भौतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक, मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक सभी से संबंधित है। महिलाओं के प्रति हमें अपनी मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत है।

अध्यक्षीय संबोधन में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने सेमिनार के विषय को सारगर्भित एवं विस्तृत बताते हुए कहा कि अतीत से प्रेरणा लेकर महिलाएं आगे बढ़कर विकसित भारत के निर्माण में अधिक से अधिक अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि महिलाएं सबसे बड़ी मैनेजमेंट गुरु और परिवर्तन की वाहिका हैं, जिनमें स्थिति को समझकर तदनुरूप कार्य करने की अद्भुत एवं स्वाभाविक क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि मैं अपनी इंजीनियर बेटियों के बदौलत कई विकसित देशों का भ्रमण कर चुका हूँ।

इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण की प्रतीक प्रो. पुनीता झा, डॉ. राफिया काजिम तथा डॉ. ज्योति प्रभा को पाग, चादर एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन तथा समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

संगोष्ठी में 100 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी एवं इतिहास, संस्कृत, हिन्दी, मैथिली, प्राचीन भारतीय इतिहास, रसायनशास्त्र, संगीत एवं नाट्य आदि विभाग के विद्यार्थी एवं एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित थे, जिन्हें फाउंडेशन की ओर से सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

इस अवसर पर शिक्षक डॉ. अविनाश कुमार, शोधार्थी मनीष कुमार, रंजीत कुमार चौधरी, प्रशांत कुमार, कुमारी शुभांगी, पंकज कुमार, कवि शंकर सिंह, सोनी कुमारी आदि ने सक्रिय सहयोग किया। अतिथियों का स्वागत सेमिनार संयोजक डॉ. मनीष कुमार ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया।

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