, Feb. 28 -- बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार की धरती प्रतिभाओं की धरती रही है। यहाँ की बेटियाँ कला, शिक्षा, राजनीति और प्रशासन हर क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही हैं। विधानमंडल में भी महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। पंचायती राज में आरक्षण ने इस दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है।
श्री सिंह ने कहा कि महिलाएँ केवल प्रतिनिधि नहीं, बल्कि सक्षम नेतृत्वकर्ता हैं। लोकतंत्र में उनकी सक्रिय भागीदारी समाज के सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है। सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। हमें मिलकर समाज की बुराइयों को समाप्त करना है, बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तथा उन्हें शिक्षा एवं अवसर प्रदान करने हैं। महिलाएँ कमजोर नहीं हैं; हमें उन्हें और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करना है।
बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि विधायिका एवं कार्यपालिका के मध्य समन्वय से ही योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है। महिला सशक्तिकरण समग्र विकास का आधार है।
समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि बिहार सरकार महिला सशक्तिकरण को विकास की मुख्यधारा में रखते हुए कार्य कर रही है। हमारी प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति की प्रत्येक महिला तक पहुँचे। इसके लिए जनप्रतिनिधियों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के अंत में बिहार विधान सभा की प्रभारी सचिव श्रीमती ख्याति सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कियापरिचर्चा एवं विचार-विमर्श के बाद सदस्यों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।यह कार्यक्रम महिला जनप्रतिनिधियों को योजनाओं की सम्यक जानकारी प्रदान कर उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
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