, March 22 -- उत्सव के प्रथम दिवस पर प्रस्तुति संस्था द्वारा प्रसिद्ध साहित्यकार नागार्जुन के उपन्यास 'पारो' पर आधारित नाटक "पारो" का मंचन किया गया।इस नाटक का नाट्य रूपांतरण विवेक कुमार ने किया है तथा निर्देशन शारदा सिंह ने किया। संगीत संयोजन वरिष्ठ रंग-निर्देशक संजय उपाध्याय ने किया।
नाटक में बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध के मिथिला क्षेत्र की सामाजिक कुरीतियों विशेषकर बाल विवाह, बहुविवाह एवं बेमेल विवाह का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया गया। कथा की नायिका 'पारो', जो एक निर्धन ब्राह्मण परिवार की मात्र तेरह वर्षीय बालिका है, इन कुरीतियों की शिकार बनती है और अंततः प्रसव पीड़ा के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है। नाटक ने दर्शकों को भावुक करते हुए समाज में व्याप्त कुप्रथाओं पर गंभीर चिंतन करने को प्रेरित किया।
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