, March 14 -- कार्यशाला में ललित कला की शिक्षिका "श्रद्धा सुमन" ने प्रतिभागियों को मधुबनी चित्रकला की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने चित्रांकन की पारंपरिक शैली, प्राकृतिक एवं पारंपरिक रंगों के उपयोग, रेखांकन की विधि, विभिन्न प्रतीकों एवं आकृतियों के महत्व तथा आधुनिक संदर्भ में मधुबनी कला के प्रयोग के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने भगवान-देवताओं, प्रकृति, सामाजिक विषयों तथा पारंपरिक मिथिला संस्कृति से जुड़े सुंदर चित्र बनाए।
इस अवसर पर शिक्षिका "शाइस्ता" ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन एवं प्रतिभागियों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। उनके सहयोग से प्रतिभागियों को चित्रकला की तकनीकों को समझने और अपने चित्रों को बेहतर बनाने में सहायता मिली।
कार्यशाला के अंतिम दिन आयोजित समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए चित्रों की एक छोटी प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे उपस्थित लोगों ने काफी सराहा। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस कार्यशाला से उन्हें नई कला सीखने का अवसर मिला तथा आगे भी वे इस कला को जारी रखना चाहती हैं।
समापन समारोह के अवसर पर सभी प्रतिभागियों को उनके सफल प्रशिक्षण के उपलक्ष्य में प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं अतिथियों ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ लड़कियों की रचनात्मक क्षमता को निखारने और हमारी पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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