, Oct. 25 -- डॉ. ठाकुर ने मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया। उन्होंने किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के सहयोग से मखाना क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।मखाना अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने कहा कि पिछले दशक में संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार कार्यों के परिणामस्वरूप मखाना की खेती का क्षेत्रफल लगभग तीन गुना बढ़ा है। संस्थान मखाना की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, उन्नत तकनीकों के प्रसार और किसानों एवं उद्यमियों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। उन्होंने किसानों से 30 नवंबर तक चलने वाले 'खेत बचाओ अभियान' से जुड़ने और इसके तहत आयोजित कार्यक्रमों का लाभ उठाने की अपील की।
निदेशक नचिकेत कोतवालीवाले ने कहा कि पहले मखाना की खेती से लेकर उसके प्रसंस्करण तक की पूरी प्रक्रिया अत्यंत श्रमसाध्य थी। हालांकि, तकनीक के इस्तेमाल और मशीनीकरण से इस क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादकों के हित में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और फसल बीमा जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है, हालांकि ये विषय मखाना अनुसंधान केंद्र के प्रत्यक्ष कार्यक्षेत्र से बाहर हैं।
इस अवसर पर प्रगतिशील मखाना किसान अमरजीत सहनी, महेश्वर ठाकुर, कपिलदेव झा, महेश मुखिया, शुभचंद मिश्रा और पूजा कुमारी को सम्मानित किया गया। मिथिला चित्रकला के माध्यम से उद्यमिता एवं कला संवर्धन में योगदान के लिए मिथिला कला केंद्र की नीतू साह तथा मिथिलाकृति हब की प्रीति को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक अमरनाथ गामी, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. विकास दास, सीफेट लुधियाना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. विश्वकर्मा, आईसीएआर पटना के डॉ. संजीव कुमार तथा प्रो. विद्यानाथ झा सहित अनेक वैज्ञानिक, किसान, उद्यमी और गणमान्य लोग उपस्थित थे।
महोत्सव के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से 500 से अधिक किसानों एवं उद्यमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रधान वैज्ञानिक एवं संयोजक डॉ. आई. एस. सिंह ने किया।
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