, April 24 -- इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री श्री यादव ने पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों, परियोजनाओं एवं आईसीडीएस कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। उन्होने 'विद्यारंभ' प्रमाण पत्रों का भी वितरण किया।कार्यक्रम के एक रोचक चरण में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों ने सांस्कृतिक एवं फैंसी ड्रेस प्रस्तुतियां दीं, जिनके माध्यम से पोषण और बाल विकास से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को प्रस्तुत किया गया।
यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ डॉ. अंतार्यामी दास ने दिव्यांगता प्रोटोकॉल के प्रमुख पहलुओं पर प्रस्तुति दी और क्षेत्रीय अनुभव साझा किए। उन्होंने समावेशी प्रारंभिक बाल विकास के लिए प्रारंभिक स्क्रीनिंग, अभिभावकों में जागरूकता तथा मजबूत रेफरल प्रणाली को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।राज्य स्तरीय इस कार्यशाला में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं तथा सहयोगी विकास संस्थाओं ने भाग लिया और छह वर्ष से कम आयु के बच्चों में विकासात्मक विलंब की समय पर पहचान में मौजूद खामियों को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यशाला में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार पांडेय, मिड-डे मील निदेशक विनायक मिश्रा, पंचायती राज निदेशक नवीन कुमार सिंह तथा आईसीडीएस की संयुक्त निदेशक श्रीमती भारती प्रियंवदा उपस्थित थी। यह सहभागिता विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने के राज्य के प्रयासों को दर्शाती है।कार्यक्रम का समापन आईसीडीएस की संयुक्त निदेशक श्रीमती भारती प्रियंवदा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके साथ ही राज्य स्तरीय कार्यशाला का समापन हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान शुरू की गई पहलों से बिहार के प्रारंभिक बाल्यावस्था तंत्र को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करने की अपेक्षा है, जिसमें समावेशन, प्रारंभिक प्रोत्साहन एवं पोषण पर विशेष बल रहेगा। यह प्रयास यूनिसेफ के निरंतर सहयोग से और सशक्त होगा।
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