, June 4 -- इसी चुनौती से निपटने के लिए पंचायती राज विभाग और एनजीओ 'सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज' (सी थ्री) के सहयोग से पंचायत स्तर पर जागरूकता और क्षमता निर्माण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत महिला मुखियाएं, वार्ड सदस्य, जीविका दीदियां और किशोरी समूह मिलकर बाल विवाह रोकने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। रोहतास, नालंदा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी और पटना जैसे जिलों में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां समय पर सूचना मिलने के बाद हस्तक्षेप कर विवाह रोक दिया गया। परिवारों को काउंसलिंग और जागरूकता के जरिए शिक्षा के महत्व को समझाया गया, जिससे कई किशोरियां अब स्कूल लौटकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं।

स्थानीय स्तर पर चल रही इस पहल के कारण गांवों में "शादी तभी, जब उम्र हो सही" जैसे संदेश प्रभावी हो रहे हैं और बाल विवाह के मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही है।

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