, Sept. 16 -- जिला प्रशासन ने आमजनों से अपील की है कि बाढ़ का पानी घटने के बाद भी दूषित पानी के उपयोग से बचें, स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करें तथा व्यक्तिगत एवं आसपास की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। जलजनित एवं संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन की सुरक्षा एवं उपचार के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में कोई पशु चिकित्सा शिविर संचालित नहीं है। अब तक कुल 5,750 पशुओं का उपचार किया गया है।

प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए अब तक 1,01,340 किलोग्राम पशु चारा वितरित किया गया है तथा पशुधन की स्थिति पर संबंधित विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।

वर्तमान में जलस्तर घट रहा है। जलस्तर घटने के दौरान नदी के किनारे एवं तटवर्ती क्षेत्रों में जमीन के अंदर पानी के दबाव में बदलाव के कारण जमीन कमजोर होने, अचानक धंसने अथवा कटाव बढ़ने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा आमजनों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

नदी के किनारे, कटाव प्रभावित क्षेत्रों, तटबंधों तथा कमजोर जमीन वाले स्थानों पर अनावश्यक रूप से न जाएँ। विशेष रूप से बच्चों एवं पशुओं को ऐसे स्थानों से दूर रखें। किसी स्थान पर जमीन में दरार, धंसाव अथवा तेज कटाव दिखाई देने पर तत्काल संबंधित अंचल प्रशासन अथवा स्थानीय पदाधिकारी को इसकी सूचना दें।

जिला प्रशासन द्वारा जलस्तर घटने के साथ कटाव प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जा रही है। संबंधित पदाधिकारियों को जमीन कटाव की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जिला प्रशासन आमजनों से अपील की है कि जलस्तर घटने के बाद भी अपनी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सतर्क रहें। बाढ़ का पानी निकलने के बाद बीमारी से बचाव, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल तथा जमीन कटाव से संबंधित सावधानियों का विशेष रूप से पालन करें।राहत एवं बचाव कार्य तथा स्थिति की लगातार निगरानी सामान्य स्थिति बहाल होने तक जारी रहेगी।

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