, Jan. 15 -- स्थानीय युवाओं को कैमरा ऑपरेशन, साउंड रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और प्रोडक्शन मैनेजमेंट जैसी विधाओं में प्रशिक्षण के साथ ही रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। बिहार राज्य फिल्म विकास निगम की तरफ से आयोजित वर्कशॉप, एक्सपर्ट मास्टर क्लास और स्क्रिप्ट राइटिंग सेमिनारों ने भी एक मजबूत फिल्म से जुड़े इको सिस्टम को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

फिल्म प्रोत्साहन नीति की सबसे खास बात 'फिल्म टूरिज्म' को प्रोत्साहित करना भी है। इसके तहत किसी फिल्म में जब किसी स्थान को दिखाया जाता है, तो वह अपने आप पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। इसी विचारधारा के तहत उन फिल्मों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया है, जिनमें राज्य के पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से दर्शाया गया हो। राजगीर, नालंदा, सोनपुर मेला और भागलपुर की घाटों अब फिल्मों के साथ-साथ पर्यटकों की पसंदीदा सूची में भी शामिल हो रहे हैं।

हाल में गोवा में आयोजित पांच दिवसीय फिल्म फेस्टिवल में भी बिहार पवेलियन का जलवा बरकरार रहा। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के 56वें संस्करण में बिहार पवेलियन में सबसे ज्यादा भीड़ रही। इसमें बिहार की फिल्म प्रोत्साहन नीति, यहां शूटिंग करने से मिलने वाले फायदे, और यहां के शूटिंग लोकेशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस महोत्सव में दुनियाभर के फिल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता और फिल्म जगत के लोग जुटे थे इसका फायदा यह हुआ कि महज 2 महीनों में ही 9 फिल्मों की शूटिंग के आवेदन आ गए, जिन्हें शूटिंग की अनुमति मिली।

बिहार के कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अरूण शंकर प्रसाद ने बताया कि बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति ने राज्य की छवि को नया आयाम दिया है। उन्होंने बताया कि 40 फिल्मों की शूटिंग अनुमति, बहुभाषी सिनेमा, स्थानीय रोजगार और फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा देकर बिहार को उभरते फिल्म हब के रूप में स्थापित किया है। मार्च-अप्रैल महीने में मुंबई में फिल्म निर्माता-निर्देशकों के साथ बैठक आयोजित करने की योजना है।

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