, Sept. 7 -- बाढ़ राहत व्यवस्था में पशुधन की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में 15 पशु शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां पशुओं के उपचार, देखभाल एवं पर्याप्त चारे की व्यवस्था की गई है। अबतक 1000 क्विंटल से अधिक पशुचारा वितरण किया गया है एवं 1680 पशुओं का इलाज भी किया गया है।प्रभावित परिवारों की तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए अब तक 6018 पॉलीथीन शीट्स का वितरण भी किया जा चुका है।
जिले के विभिन्न तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जहां कहीं रिसाव, ओवरफ्लो अथवा अन्य समस्या सामने आ रही है, वहां जल संसाधन विभाग की टीमें तत्काल आवश्यक मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य कर रही हैं।
बाढ़ से प्रभावित सड़कों की भी आवश्यकता के अनुसार मरम्मत कराई जा रही है। जिन स्थानों पर अभी जलजमाव है, वहां पानी का स्तर कम होते ही सड़क की मरम्मत कर आवागमन को शीघ्र सामान्य किया जाएगा।
जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की निरंतर समीक्षा की जा रही है। स्थानीय परिस्थितियों एवं जरूरत के आधार पर राहत एवं बचाव संसाधनों को लगातार बढ़ाया जा रहा है। सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रभावित नागरिकों तक समय पर सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।
जिला प्रशासन द्वारा नदियों के जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील क्षेत्रों, राहत एवं बचाव गतिविधियों तथा दियारा क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं को तत्काल सुदृढ़ किया जा रहा है।
जिलाधिकारी कुंदन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा ने गंगा नदी के विभिन्न घाट एवं सामुदायिक रसोई केंद्र का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया. लोगों से बात कर उनका हाल चाल जाना। उन्होंने पुनपुन में भी बाढ़ राहत कार्य का जायजा लिया एवं अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता से काम करने के निदेश दिए।
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