, Sept. 20 -- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित गतिविधि कैलेंडर के तहत प्रतिदिन कम से कम पांच गतिविधियों का आयोजन किया जाना है। स्थानीय जरूरतों और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित की जा सकती हैं। आयोजित गतिविधियों और उपलब्धियों का प्रतिदिन का आंकड़ा जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर अपलोड किया जा रहा है।पोषण माह के दौरान आहार विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं गर्म पका भोजन (एचसीएम), सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, बाल विकास के लिए पोषण एवं प्रारंभिक उद्दीपन तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बच्चों एवं परिवारों को संतुलित व पौष्टिक आहार, स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन, बच्चों के प्रारंभिक विकास तथा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और उपलब्ध सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
बिहार में समुदाय आधारित संस्थाओं के माध्यम से भी पोषण संदेश को घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है। जेईवीआईकेए के स्तर पर स्वयं सहायता समूहों की बैठकों में संतुलित आहार, स्थानीय मोटे अनाज, एनीमिया से बचाव, स्तनपान, ऊपरी आहार और स्वच्छता जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। गांवों में पोषण रैली, प्रभातफेरी, आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ समन्वय बैठक तथा पोषण वाटिका जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
समाज कल्याण विभाग के अनुसार पोषण माह का जोर केवल एक माह तक कार्यक्रम आयोजित करने पर नहीं, बल्कि परिवारों के खान-पान और स्वास्थ्य व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने पर है। बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी, संतुलित आहार, स्तनपान, पूरक आहार, स्वच्छता, मातृ पोषण और प्रारंभिक बाल विकास जैसे विषयों पर लगातार जागरूकता पैदा की जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर पिछले पोषण माह अभियानों के जरिए मातृ पोषण, शिशु एवं छोटे बच्चों के आहार, वृद्धि निगरानी और स्वच्छता संबंधी व्यवहार में सुधार के लिए जनभागीदारी को बढ़ाया गया है।
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