, Oct. 22 -- इस अभियान में विद्यालयों के साथ अभिभावकों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, असामान्य भय, चुप्पी या किसी व्यक्ति के प्रति असहजता दिखने पर अभिभावकों और शिक्षकों को संवेदनशीलता से उनकी बात सुननी चाहिए। ऐसे संकेत अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करने के बजाय बच्चे से सहजता से बात कर जरूरत के अनुसार सहायता लेनी चाहिए।विद्यालयों में बच्चों को बिना डर अपनी समस्या साझा करने का भरोसा देना और उनकी शिकायत मिलने पर संवेदनशीलता तथा गोपनीयता के साथ कार्रवाई करना अभियान का अहम उद्देश्य है। बच्चों की सुरक्षा केवल प्रशासन या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समाज का साझा दायित्व है।

जिला प्रशासन द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार अभियान के तहत प्रशिक्षित शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रत्येक माह एक दिन विद्यालय में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। नुक्कड़ नाटक, निबंध, वाद-विवाद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप जानकारी दी जाएगी, ताकि वे अपने अधिकारों को समझने के साथ किसी असुरक्षित परिस्थिति में मदद मांगने के लिए भी प्रेरित हों।

कार्यक्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी तथा शिक्षा विभाग से रेयाज अहमद, शकील अहमद और अमरेश कुमार सहित मशाल मास्टर प्रशिक्षक सुनील कुमार, अरविंद कुमार, भानु प्रकाश, अमित कश्यप, अंशु यादव और रवि कुमार सिंह समेत अन्य पदाधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित थे।

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