, Aug. 13 -- नई पेपरलेस व्यवस्था का उद्देश्य इसी डिजिटल इकोसिस्टम को और व्यापक बनाते हुए भूमि निबंधन की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन एवं कागजरहित बनाना है।पेपरलेस निबंधन प्रणाली में भूमि की खरीद-बिक्री से पहले उसकी वास्तविक स्थिति की ऑनलाइन जांच को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
नई व्यवस्था में जीआइएस तकनीक और ऑनलाइन सत्यापन के माध्यम से संबंधित भूमि की स्थिति की पुष्टि की जाएगी। इससे खरीदार को जमीन से संबंधित जानकारी अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य है कि भूमि की खरीद-बिक्री से पहले उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड और स्थल संबंधी जानकारी के आधार पर आवश्यक सत्यापन किया जा सके। इससे गलत अथवा भ्रामक जानकारी के आधार पर होने वाले लेन-देन की संभावना को कम करने और भूमि विवादों में कमी लाने में मदद मिलेगी।
निबंधन प्रक्रिया में जीआइएस तकनीक के उपयोग से जमीन के स्थल संबंधी विवरण के सत्यापन को अधिक तकनीकी एवं प्रभावी बनाया जा रहा है।
जीआइएस आधारित व्यवस्था से भूमि की लोकेशन एवं उपलब्ध डिजिटल जानकारी को तकनीकी रूप से जोड़ा जा सकेगा। इससे भूमि लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने और खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा की दिशा में मदद मिलेगी।
सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए निबंधन प्रक्रिया को और सुगम बनाने की विशेष पहल की है।पहले 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए होम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू की गई थी। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई 2026 को इसकी आयु सीमा घटाकर 75 वर्ष से अधिक कर दी। इसके तहत पात्र वरिष्ठ नागरिकों को निबंधन कार्यालय जाने की आवश्यकता कम होगी और मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के माध्यम से घर पर निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
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