, Sept. 20 -- इस अवसर पर बिहार सरकार और जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। इनमें अस्थायी आवास, सामुदायिक भोजन, स्वास्थ्य शिविर और यातायात व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल हैं। 'पेंट द सिटी' कार्यक्रम के तहत कलाकारों और विद्यार्थियों ने पितृपक्ष, पिंडदान और गयाजी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी विभिन्न विषयों पर आकर्षक चित्र उकेरे हैं।

लखीबाग, मानपुर की रहने वाली चाहत वत्स ने बताया कि जिला पदाधिकारी की पहल पर शुरू किए गए 'पेंट द सिटी' कार्यक्रम के लिए उन्होंने अपनी पेंटिंग ईमेल के माध्यम से भेजी थी। चयन के बाद उन्हें शहर की दीवार पर पेंटिंग बनाने का अवसर मिला। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कलाकारों को उपलब्ध कराई गई पेंटिंग सामग्री और अन्य सुविधाओं के लिए जिला प्रशासन का आभार जताया।

रामधनपुर, कबड़ापर, शिव मंदिर के पास रहने वाली तान्या ने बताया कि कार्यक्रम के लिए चयनित प्रतिभागियों को पेंटिंग बनाने के लिए दीवार और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। उनकी पेंटिंग की थीम 'गयासुर की तपस्या और भगवान विष्णु का आशीर्वाद' है, जिसमें गयासुर की तपस्या और भगवान विष्णु द्वारा उन्हें दिए गए आशीर्वाद को दर्शाया गया है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए ऐसा मंच मिलना महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए नाश्ते और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है।

आईआईएम बोधगया की छात्रा विदुषी मौर्य ने बताया कि पितृपक्ष के अवसर पर वह अपनी टीम के साथ पेंटिंग कार्यक्रम में शामिल हुई हैं। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व है और गयाजी इसके लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है। उनकी टीम पेंटिंग के माध्यम से पितृपक्ष और पिंडदान की परंपरा को प्रदर्शित कर रही है।उन्होंने बताया कि उनकी पेंटिंग में राजा दशरथ के पिंडदान से जुड़ी कथा को दर्शाया गया है। इसका उद्देश्य पितृपक्ष के महत्व को लोगों तक पहुंचाने के साथ ही गयाजी की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को कला के माध्यम से प्रदर्शित करना है।

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