, Oct. 27 -- पशु सखी मॉडल की सफलता की कहानी लखीसराय जिले के चानन प्रखंड की ईंटोन पंचायत स्थित मननपुर गांव में देखने को मिलती है। यहां इंटरमीडिएट उत्तीर्ण खुशबू कुमारी जीविका के मासूम महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर एक सफल पशु सखी के रूप में काम कर रही हैं। वर्ष 2019 में जीविका से जुड़ने के बाद खुशबू ने खेती में निवेश के लिए स्वयं सहायता समूह से एक लाख रुपये का ऋण लिया। इससे उन्हें खेती के माध्यम से प्रतिवर्ष 40 से 50 हजार रुपये तक मुनाफा होने लगा। उनकी सक्रियता और कार्यक्षमता को देखते हुए वर्ष 2023 में उन्हें पशु सखी के रूप में चयनित किया गया।

जीविका से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद खुशबू आज गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुओं की देखभाल कर रही हैं। विशेष रूप से बकरीपालकों को नियमित स्वास्थ्य निगरानी, कृमिनाशक दवाओं के उपयोग, पीपीआर एवं ईटी जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण, विटामिन और प्राथमिक उपचार संबंधी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। उनके प्रयासों से पशुपालकों में पशुओं की देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ी है और बकरियों की मृत्यु दर में कमी आने में मदद मिली है। उनके समर्पण और सेवाभाव के कारण ग्रामीण महिलाएं उन्हें स्नेहपूर्वक 'डॉक्टर दीदी' कहकर बुलाती हैं।

खुशबू कुमारी की तरह राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत पशु सखियां पशुपालकों को पशुओं की बीमारियों की पहचान, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं के उपयोग और संतुलित आहार के संबंध में जागरूक कर रही हैं। इससे पशुओं को बीमारियों से बचाने, पशुधन के नुकसान को कम करने और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल रही है।

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