, Aug. 21 -- इससे पूर्व अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद दोनों महान संगीतज्ञों के चित्र पर माल्यार्पण किया गया तथा विभाग के छात्र-छात्राओं ने कुलगीत प्रस्तुत किया।विभागाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह 'काव्या' ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर भारतीय संगीत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण नाम हैं। उन्होंने विश्वभर में भारतीय संगीत की पवित्रता को रेखांकित करते हुए गेय बंदिशों में सात्विकता को महत्वपूर्ण स्थान दिया। महात्मा गांधी की सभाओं में भी उनकी निरंतर उपस्थिति रहती थी।
उस्ताद बिस्मिल्ला खां को स्मरण करते हुए प्रो. काव्या ने कहा कि उनका दरभंगा से गहरा संबंध रहा। वे राजदरभंगा के नियमित संगीतज्ञ रहे थे। अपने अंतिम दिनों में भी उस्ताद बिस्मिल्ला खां दरभंगा को याद करते रहे और यहां आने की इच्छा व्यक्त की थी। उनकी शहनाई की गूंज सदैव भारतीय संगीत जगत में स्मरणीय रहेगी।
कार्यक्रम के अंत में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिषेक स्मिथ ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि पंडित पलुस्कर और उस्ताद बिस्मिल्ला खां भारतीय संगीत के साथ-साथ विश्व पटल पर सदैव स्मरणीय रहेंगे।
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