, Oct. 24 -- ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)/लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले नवाचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मिशन के माध्यम से मक्के के बेकार समझे जाने वाले जैविक छिलकों से पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार करने की तकनीक और इसकी प्रक्रिया को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इंजीनियर नाज के सहयोग से स्थानीय लोगों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे कृषि अपशिष्ट का उपयोगी उत्पादों में रूपांतरण हो सके।इंजीनियर नाज का कहना है आगामी 10 वर्षों में सिंगल यूज प्लास्टिक से बने कम से कम 100 उत्पादों को पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में रिप्लेस करने की उनकी योजना है। कप, प्लेट सहित अन्य उत्पाद बनाने के लिए किसानों से मक्के का छिलका करीब 1 से 2 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदते हैं। एक उत्पाद को बनाने में 45 से 50 पैसे की लागत आती है और कटोरी जैसे उत्पाद को करीब 2 रुपये प्रति पीस की दर से बेचा जाता है।
इंजीनियर नाज ने बताया कि मौजूदा समय में इस कारोबार से उनकी सालाना करीब 5 लाख रुपये की विशुद्ध आमदनी हो रही है। इनकी छोटी सी फैक्ट्री में आठ स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया गया है।
ग्रामीण विकास और सूचना एवं जन सम्पर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा किग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के नवाचार बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। मक्के के छिलके से पर्यावरण अनुकूल बर्तन बनाना बेहद सराहनीय और अनुकरणीय प्रयास है। हमारी सरकार ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने और कृषि अपशिष्ट से मूल्य संवर्धन करने वाली योजनाओं को लगातार बढ़ावा दे रही है।उन्होंने कहा कि यह तकनीक न सिर्फ सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम कर पर्यावरण को स्वच्छ रखेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। सरकार ऐसे होनहार उद्यमियों को हर संभव मदद मुहैया करने के लिए सदैव तत्पर है।
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