, Oct. 18 -- नालंदा जिले की तेल्हारा पंचायत स्थानीय उद्यमिता, आजीविका संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता के जरिए सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण की थीम-1 'गरीबी मुक्त पंचायत' का मॉडल बनकर उभरी है। यहां की मुखिया प्रतिमा देवी ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय को नई दिशा दी है। करीब 150 परिवार बकरी पालन कर रहे हैं, जबकि 450 से अधिक लोग दुग्ध व्यवसाय से जुड़े हैं। सूअर, मुर्गी और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां भी यहां सक्रिय हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं पैंट-टीशर्ट, लेदर जैकेट, एल्युमीनियम बर्तन, पेपर प्लेट और मशरूम उत्पादन कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। पंचायत का बाजार अब जहानाबाद, पटना और नालंदा समेत आसपास की कई पंचायतों तक पहुंच चुका है।मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड की बाघा खाल पंचायत की मुखिया विभा कुमारी ने पंचायत को बाल-केंद्रित मॉडल में ढाला है। उन्होंने तीन स्कूलों में बाल संसद और दो स्कूलों में ग्रीन क्लब स्थापित किए, ताकि बच्चे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें। 30 से अधिक रात्रि चौपाल और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से बाल विवाह, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाई गई। परिणामस्वरूप स्कूल छोड़ चुके 17 बच्चों का पुनः नामांकन कराया गया।

दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड अंतर्गत लदहो पंचायत की वार्ड नंबर 03 की 59 वर्षीय वार्ड सदस्य फूल कुमारी देवी ने साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और इच्छाशक्ति से कोई भी सामुदायिक नेता बन सकता है। अशिक्षित होते हुए भी उन्होंने स्वास्थ्य, स्वच्छता, महिला सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में सकारात्मक बदलाव किए। उन्होंने अपने वार्ड के सुनसान रास्ते को चिन्हित कर स्थानीय थाने से नियमित पुलिस गश्त की व्यवस्था कराई, जिससे महिलाओं और किशोरियों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई।

इसी पंचायत में महिला जनप्रतिनिधियों ने स्कूल में सैनिटरी पैड की अनुपलब्धता को गंभीर समस्या के रूप में चिन्हित किया। उन्होंने मुखिया कविता देवी को सामूहिक आवेदन सौंपा, जिसके बाद मिडल स्कूल में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और सुरक्षित निस्तारण इकाई स्थापित की गई। इस पहल में मंजू देवी, फूल कुमारी देवी, विभा देवी, जैतून खातून और बेबी कुमारी की सक्रिय भूमिका रही।

उसरी पंचायत के वार्ड नंबर 8 की श्यामपुल देवी कभी घर से बाहर निकलने में भी झिझकती थीं। पहली बार वार्ड सदस्य बनने के बाद उन्होंने पति के सहयोग से पंचायत के काम सीखे और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनीं। आज वे वार्ड में स्ट्रीट लाइट मरम्मत, बाढ़ के दौरान नाव की व्यवस्था और दवाओं की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को जिम्मेदारी से निभा रही हैं। लोगों के विश्वास से वे लगातार दो बार वार्ड सदस्य चुनी गई हैं। उनके प्रयासों से वार्ड में सड़क निर्माण का कार्य भी शुरू हो गया है।

मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड के पोखरेरा गांव में 15 वर्षीय नंदनी कुमारी की शादी परिवार जल्द कराना चाहता था। वार्ड सदस्य मीना देवी ने मां को शिक्षा और बेहतर भविष्य के महत्व के बारे में समझाया, जिसके बाद शादी का फैसला टाल दिया गया। इसी प्रखंड के बहिलवारा रूपनाथ उत्तरी गांव में गरीबी के कारण 15 वर्षीय सोनम कुमारी पर शादी का दबाव था। यहां वार्ड सदस्य फूलकुमारी देवी और जीविका समूह ने परिवार को समझाकर सोनम को दोबारा स्कूल भेजा। आज दोनों लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं।

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