, March 19 -- नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने इस अवसर पर कहा कि किसान समूहों को राशक्त करने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। जापान और डेनमार्क जैरो देश सहकारिता के माध्यम से आगे बढ़े हैं। हमें भी देश में सहकारिता मॉडल को विकसित करना होगा, जिससे कमजोर तबके का तेजी से विकास होगा।
नीति आयोग की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. राका सक्सेना ने कहा कि बिहार में छोटे जोत वाले किसानों की संख्या काफी अधिक है। देश में एक हेक्टेयर से कम भूमि वाले सीमांत किसानों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है, जबकि बिहार में ऐसे किसानों की संख्या लगभग 87 प्रतिशत है। ऐसे में जरूरत है कि हम ऐसे मॉडल विकसित करें, जिससे यहां की कृषि और किसानों का विकास हो। पैक्सों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी मदद मिल सकती है।
दो दिवसीय इस कार्यशाला के दौरान पैक्स के आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण, व्यावसायिक विस्तार, वित्तीय समावेशन एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ उनके समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही, पूर्वी भारत के राज्यों में सफल मॉडलों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श होगा।
इस कार्यशाला का उद्देश्य है कि पैक्स को बहुआयामी संस्थान के रूप में विकसित कर उन्हें कृषि के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में भी सक्षम बनाना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हों और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
कार्यशाला के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य की नीतियों एवं कार्यक्रमों के लिए ठोस सुझाव तैयार किए जाएंगे, जो पूर्वी भारत में कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेंगे।
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