, Aug. 27 -- बाढ़ संभावित जिलों में मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार बीएमएसआईसीएल के माध्यम से 60 मुख्य आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं तथा टीकों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ के दौरान सर्पदंश की आशंका को देखते हुए एंटी-स्नेक वेनम की व्यवस्था की गई है। वहीं, कुत्ते एवं विषैले जीवों के काटने के उपचार के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है।दस्त, डायरिया एवं डिहाइड्रेशन से बचाव और उपचार के लिए ओआरएस एवं जिंक टैबलेट्स उपलब्ध कराई गई हैं। पेयजल को कीटाणुरहित एवं शुद्ध बनाने के लिए हैलाजोन गोलियों की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद क्षेत्रों में कीटाणुशोधन तथा महामारी की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर एवं चूना उपलब्ध रहेगा। इसके अतिरिक्त बुखार, जलजनित रोगों, त्वचा संक्रमण एवं चोट के उपचार के लिए पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स तथा आवश्यक मलहम का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है।
बाढ़ के कारण विस्थापन की स्थिति में प्रभावित आबादी के लिए स्थापित किए जाने वाले राहत शिविरों तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित सामुदायिक रसोईघरों के समीप अनिवार्य रूप से अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएंगे।
सामुदायिक रसोई स्थलों पर आने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाएगी। साथ ही वहां स्वच्छ भोजन एवं शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था की जाएगी।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद डायरिया, हैजा, त्वचा रोग, मलेरिया एवं डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जलजमाव वाले स्थानों एवं प्रभावित गांवों में ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव युद्धस्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संभावित महामारी एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था की निरंतर निगरानी की जाएगी तथा आवश्यकता के अनुसार त्वरित चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य संबंधी कार्रवाई की जाएगी।
बाढ़ एवं अन्य आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम तथा राज्य आपदा प्रबंधन नीति के तहत स्वास्थ्य विभाग संबंधित एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित रखेगा।
आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था के तहत एसडीआरएफ (प्रथम रिस्पांस), एनडीआरएफ (द्वितीय रिस्पांस) तथा आवश्यकता पड़ने पर थल सेना (तृतीय रिस्पांस) के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी तैयारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए, जिससे किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में प्रभावित नागरिकों को तत्काल और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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