, May 13 -- प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने एआई के उपयोग एवं दुरुपयोग पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि एआई कार्यक्षमता बढ़ाने और समय की बचत में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. नौशाद आलम ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि एआई आज दिन-रात लगातार सेवा प्रदान करने वाली तकनीक बन चुकी है और समय के साथ इसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एआई ने भाषा और संचार को आसान बना दिया। ए आई आधारित अनुवाद और वॉइस टूल्स विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद को सरल बना रहे हैं। इससे डिजिटल दुनिया में अधिक लोग जुड़ पा रहे हैं।उन्होंने कहा कि एआई के उपयोग में सावधानी भी आवश्यक है। एआई जितना उपयोगी है, उतना ही इसके दुरुपयोग का खतरा भी है। गलत जानकारी, फेक वीडियो, साइबर अपराध और निजता संबंधी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। इसलिए एआई का उपयोग जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ करना आवश्यक है।

कार्यशाला में सॉफ्टप्रो इंडिया के मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) इंजी. अर्जित वर्मा एवं मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) इंजी. रोहित कुमार रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित रहे।

इंजी. अर्जित वर्मा ने प्रतिभागियों को जेमिनी, क्लॉड एवं नोटबुक एलएम जैसे विभिन्न एआई टूल्स की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एलएलएम आधारित एआई टूल्स के प्रभावी उपयोग के लिए सही प्रॉम्प्ट देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग सीख लें तो वे एआई टूल्स का अधिक कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने शिक्षकों को एआई की सहायता से क्विज़, असाइनमेंट एवं व्याख्यान सामग्री को अधिक रोचक एवं प्रभावी ढंग से तैयार करने के तरीकों से भी अवगत कराया।

कार्यशाला में 200 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की सहभागिता रही। इसमें विभाग की शिक्षिका डॉ. सुमनदीप कौर, विश्वविद्यालय पीआरओ डॉ. आर.एन. चौरसिया, डॉ. अंकित कुमार, डॉ. पारुल बनर्जी, उत्सव पाराशर सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान की विभिन्न शाखाओं की छात्राओं ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूजा अग्रवाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीपक कुमार ने प्रस्तुत किया।

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