, Sept. 14 -- आचार्य राकेश झा ने बताया कि तीज पूजा में श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही सहित पंचामृत से स्नान के बाद रंग-बिरंगे वस्त्र, चंदन का लेप, भस्म, फूलमाला, इत्र, भांग, धुप-दीप के बाद ऋतुफल, मिष्ठान तथा नाना प्रकार के पकवान भोग स्वरूप अर्पित कर आरती उतारी फिर अपनी कामना पूर्ति के लिये प्रार्थना किया I मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दिख रही थी I संध्या काल में व्रती में भगवान की पूजा के बाद ब्राह्मण देवता से संकल्प का मंत्र पढ़ाकर कथा सुनी I ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि सोमवार को तीज के मौके पर सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षा, दीर्घायु, संतान की प्राप्ति व उन्नति, सुख-समृध्दि की कामना से हरितालिका तीज पर्व की पूजा में सर्वप्रथम विध्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा, कलश पूजन, कृतिमुख, नंदी के साथ-साथ प्रधान देव भगवान भोलेनाथ तथा माता गौरी की पूजा हुई I शिव को अकावन, भांग, धतूरा, बेलपत्र तो माता पार्वती को लाल फूल, सिंदूर, इत्र आदि से पूजा किया गया Iमंगलवार को व्रती महिलाएं अन्न, वस्त्र, ऋतुफल, दक्षिणा आदि का दान कर पारण करेंगी Iवैदिक पंडित राकेश झा ने कहा कि मिथिलांचल में किया जाने वाला प्रसिद्ध त्योहार चौठचंद्र (चउरचन) व्रत भी सोमवार को स्वाति नक्षत्र एवं ऐन्द्र योग के सुयोग में मनाया गया Iहरितालिका तीज का यह पर्व महिलाओं की आस्था और दांपत्य जीवन के प्रति समर्पण के साथ-साथ मायके और ससुराल के बीच पारिवारिक संबंधों को भी मजबूत करता है। बदलते समय के बावजूद बिहार में तीज की यह लोक परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ कायम है।

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