, March 20 -- बीआरएम कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षक एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप टाटा ने बताया कि फिलहाल परिसर में रबड़ का हेबिया ब्राजीलिएंसेस का पौधा लगाया गया है। जिसके बीज मेघालय से मंगवाए गए हैं। रबड़ की यह उष्णकटिबंधीय प्रजाति सामान्यत: 30 से 40 मीटर तक ऊंचा होता है और लगभग सात वर्ष की आयु से लेकर 30 वर्ष तक रबड़ उत्पादन देता है। इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक रबड़ स्रोतों के साथ-साथ वैकल्पिक रबड़ उत्पादक पौधों जैसे रशियन डंडेलियन और गुआयुले पर भी प्रयोग किए जा रहे हैं। इऩ प्रजातियों को बिहार की लगभग चार महीने की ठंड को रशियन डंडेलियन के लिए अनुकूल माना जा रहा है, जो लगभग छह महीने में तैयार हो जाता है। इस दिशा में विश्वविद्यालय ने हिमालयन वन शोध संस्थान, शिमला और रबर रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया है।
वहीं दूसरी ओर आधुनिक खेती की लहर का असर अब गांव-गांव में दिखने लगा है। कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड अंतर्गत भटवाड़ा पंचायत के रहने वाले प्रगतिशील किसान अजीत कुमार मंडल अपने खेतों में आधुनिक खेती का मॉडल पेश कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। इजरायली पद्धति से ड्रैगन-फ्रुट की खेती कर रहे अजीत ने यह साबित कर दिया है कि सही तकनीक और जानकारी से खेती को सालों भर लाभदायक बनाया जा सकता है। जहां सामान्यत: बिहार में ड्रैगन फ्रूट की खेती केवल छह महीने तक सीमित रहती है, वही अजीत के खेतों में उत्पादन लगभग पूरे साल जारी रहता है। पहले वह केले की खेती करते थे, लेकिन फसल में हुए नुकसान ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया।
अजीत ने हार नहीं मानी और समाधान की तलाश में उन्होंने इंटरनेट व यूट्यूब का सहारा लेकर उच्च बाजार मूल्य वाली फसलों की खोज शुरू की। यही से इनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। उन्होंने वियतनाम ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और इजरायली तकनीक अपनाकर उसे और उन्नत बनाया।
शुरुआत में करीब सात लाख रु. का निवेश करने वाले अजीत आज लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। खास बात यह है कि उनका यह निवेश आने वाले लगभग 20 वर्षों तक स्थायी आय का आधार बन चुका है। आज उनके खेत उत्पादन का केंद्र बनने के साथ-साथ सीखने का केंद्र भी बन गया है। किसान यहां आकर आधुनिक खेती की तकनीक समझ रहे हैं। और उनसे प्रेरित होकर ड्रैगन फ्रूट जैसे व्यवसायिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
बिहार की खेती अब बदलाव के दौर से गुजर रही है। बिहार सरकार आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उधान निदेशालय ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए अनुदान प्रदान कर रही है। राज्य सरकार ड्रैगन फ्रूट का क्षेत्र विस्तार राज्य के 23 जिलों अररिया, औरंगाबाद, बेगुसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, जमुई, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णियां, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा एवं सीवान में कर रही है। साथ ही कृषि से जुड़ी नवाचारों व नए तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है। जहां एक ओर वैज्ञानिक प्रयोग नई संभावनाएं खोल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अजीत मंडल जैसे किसान इन संभावनाओं को जमीन पर उतारकर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं।
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