, May 12 -- डीजीपी ने कहा कि पुलिस महकमा में एक दशक पहले तक महिलाओं की संख्या तीन प्रतिशत हुआ करती थी। अब यह बढ़कर 30 फीसदी से अधिक हो गई है। ऐसे में महिलाओं के प्रति अपराध को नियंत्रित करने में खासतौर से पहल करनी चाहिए। इसका असर भी दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ कानूनी प्रावधानों की कमी नहीं है। बड़ी संख्या में कानून पहले से ही मौजूद हैं, लेकिन इन्हें धरातल पर उतारना आवश्यक है। कानून प्रावधानों का शिद्दत से पालन कराने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज में तेजी से असहनशीलता बढ़ी है। यह माता-पिता की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों पर समुचित नजर रखें। उनके बच्चे कही अपराध के रास्ते पर तो नहीं जा रहे हैं, इसका निरंतर ध्यान रखने की आवश्यकता है।
इस मौके पर एडीजी (कमजोर वर्ग) श्री अमित कुमार जैन ने कहा कि महिला या लैंगिक अपराध से जुड़े मामलों में प्रो-एक्टिव पुलिसिंग की अवधारना को अपनाने की आवश्यकता है। पीड़ित को यह विश्वास होना चाहिए कि कानून उनके साथ खड़ा है। कानून का पालन कराने वाली एजेंसी पर ही यह दायित्व है। उन्होंने कहा कि महिला हिंसा के मामले में बिहार का औसत राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
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