, March 14 -- विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि डिजिटल कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से खेती को अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाया जा सकता है। इससे किसानों को समय पर आवश्यक जानकारी प्राप्त होगी और उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ उपज में भी वृद्धि संभव हो सकेगी।

इसके साथ ही किसानों को ड्रोन तकनीक के उपयोग के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। ड्रोन के माध्यम से फसलों की निगरानी, उर्वरक एवं कीटनाशक के छिड़काव तथा खेतों की स्थिति का आकलन तेजी और सटीकता के साथ किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इससे पहले यहां "ड्रोन दीदी" कार्यक्रम के तहत कई महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा बिहार पुलिस सहित अन्य विभागों के कर्मियों को भी ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में इस तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा सके।

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