, April 27 -- बैठक में पांडुलिपियों के सत्यापन के बाद अस्वीकृत सर्वेक्षणों पर भी चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार, कुल 5,59,104 पांडुलिपियों के सर्वेक्षण अस्वीकृत हुए हैं. गया, मुजफ्फरपुर और पटना जैसे जिलों में स्वीकृत पांडुलिपियों की संख्या क्रमशः 1,49,378, 1,17,839 और 1,01,810 रही।
मुख्य सचिव श्री अमृत ने मिशन की सफलता के लिये जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिलों में छिपी हुई पांडुलिपियों की पहचान के लिए खोज अभियान को और अधिक व्यापक, निरंतर और सघन बनाया जाए। जिला स्तर पर पांडुलिपियों के संग्रहण के लिए एक सुव्यवस्थित और औपचारिक तंत्र को मजबूत किया जाए।
श्री अमृत ने निर्देश दिये कि प्रत्येक जिले में नोडल पदाधिकारी के नेतृत्व में एक 'अनौपचारिक समूह' बनाया जाए, जिसमें विषय से जुड़े विशेषज्ञ, सक्रिय व्यक्ति और संस्थाएं शामिल हों। सर्वेक्षणों के उच्च अस्वीकृति दर को एक चुनौती के रूप में लेते हुए इसके कारणों का विश्लेषण किया जाए। गुणवत्ता सुधार के लिए विशेष प्रशिक्षण और जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं। उन्होंने जिलाधिकारियों को स्वयं इस मिशन का निरंतर पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन करने का निर्देश दिया है, जिससे बिहार पांडुलिपि संरक्षण में देश का शीर्ष राज्य बन सकें।
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