, Sept. 1 -- किशनगंज की असीना खातून की कहानी ग्रामीण उद्यमिता की बड़ी मिसाल है।उन्होंने घर से हस्तनिर्मित मसाला उत्पादन शुरू किया और धीरे-धीरे अपने उत्पादों की बिक्री आसपास के जिलों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल तक पहुंचाई। उनके उद्यम से लगभग 40 जीविका दीदियों को रोजगार मिला और उनकी मासिक आय आज लगभग 60 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। विभिन्न मेलों और एक्सपो में भागीदारी एवं पुरस्कार ने उनके उद्यम को नई पहचान दी है। नालंदा की बीबी तराना ने बताया कि जीविका के सहयोग और प्रशिक्षण से मसाला उत्पादन को व्यवस्थित रूप दिया गया। गुणवत्ता और शुद्धता को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपने उत्पादों के लिए ग्राहकों का विश्वास बनाया। आज उनका वार्षिक कारोबार लगभग 3.40 लाख रुपये से अधिक है। इसी जिले की मंजुला कुमारी ने भी जीविका से जुड़कर मशरूम उत्पादन से अपनी उद्यमिता की शुरुआत की। उन्होंने स्वयं सफलता हासिल करने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर इस गतिविधि से जोड़ा। आगे चलकर उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर मसाला उत्पादन एवं पैकेजिंग का कार्य शुरू किया। आज उनकी आय लगभग 30-40 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई है। इधर, संगीता देवी ने आर्थिक कठिनाइयों और कर्ज की परेशानियों के बीच जीविका समूह से जुड़कर छोटे ऋणों का उपयोग किया और मसाला व्यवसाय शुरू किया। धीरे-धीरे उनका व्यवसाय आसपास के क्षेत्र में पहचान बनाने लगा। सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन सभी महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि बिहार सरकार के इस परियोजना का असली बदलाव केवल आय बढ़ने तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है। जो महिलाएं कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे आज उद्यम चला रही हैं, बाजार से जुड़ रही हैं और दूसरी महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण दे रही हैं।
ग्रामीण विकास और सूचना एवं जन सम्पर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा किबिहार की ग्रामीण महिलाएं आज स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं। स्वावलंबी दीदियां बिहार को आर्थिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि कभी आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और कर्ज के बोझ तले जीने को मजबूर हमारी बहनों के जीवन में जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद एक अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। उनकी छोटी-छोटी बचत से शुरू हुआ यह सफर आज स्वरोजगार, उद्यमिता और सम्मानजनक जीवन का पर्याय बन चुका है।
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