, Oct. 3 -- जीविका के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के चारों जिलों में बकरी पालन और मांस उत्पादन के कारोबार से वर्ष 2021-22 में किसानों को किया गया भुगतान 11.47 लाख रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 146.70 लाख रुपये हो गया है। वहीं, अगस्त 2026 तक कंपनी ने कुल 15.49 करोड़ रुपये का संचयी टर्नओवर दर्ज किया है और इससे सीधे उत्पादक महिलाओं को 5.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि कंपनी की तरफ से लाइव बॉडीवेट (जीवित वजन) के आधार पर पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली अपनाई गई है। प्रखंड स्तर पर खरीद-बिक्री को सुगम बनाने के लिए 44 डेमो सह कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। गांव-गांव तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए 700 से अधिक प्रशिक्षित पशु सखियों' का नेटवर्क कार्यरत है। वर्ष 2025-26 में 2.15 लाख से अधिक डीवॉर्मिंग और 1.95 लाख से अधिक टीकाकरण सेवाएं दी गईं। इसके अलावा, सीमांचल जीविका मीट आउटलेट के माध्यम से अगस्त 2026 तक 14,566 किग्रा मांस की बिक्री कर 1.03 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं सूचना और जन सम्पर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा किसीमांचल में बकरी पालन के रूप में 20,000 महिलाओं की एकजुटता ने 15 करोड़ के कारोबार का इतिहास रचा है। यह सफलता इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर सामूहिक उद्यमिता से जुड़ती हैं, तो बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की सोच के अनुरूप जीविका के माध्यम से हमारी दीदियां स्वावलंबी और सशक्त बन रही हैं। सीमांचल में बकरी पालन को संगठित बाजार और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर जीविका ने बिचौलियों की भूमिका खत्म की है और महिलाओं को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाया है। ग्रामीण विकास विभाग इस सफल मॉडल को राज्य के अन्य हिस्सों में भी आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
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