, May 29 -- कार्यशाला को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि विगत 20 वर्षों में जीविका ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का एक सुदृढ़ संगठन का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक संस्थाओं के निर्माण और उनके क्षमतावर्द्धन के साथ-साथ महिलाओं का वित्तीय समावेशन कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि, इसी क्रम में जीविका निधि की स्थापना स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए ऋण की सुचारू रूप से उपलब्धता के प्रति सफल प्रयास है। इसके माध्यम से उद्यम कर रही या आरंभ करने वाली महिलाओं को आसानी से पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे उनके उद्यम का सतत् विकास संभव हो सकेगा। जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, हिमांशु शर्मा ने कहा कि जीविका निधि की स्थापना स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिये एक वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था के रूप में की गई है। उन्होंने कहा कि इस संस्था के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के बीच ऋण प्रवाह को सुगम बनाया जा सकेगा तथा बड़े मांग वाले ऋण की आपूर्ति की जा सकेगी। साथ ही ऋण के लिए सूक्ष्म वित्त संस्थान पर निर्भरता कम हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इस संस्था के माध्यम से एक वर्ष में एक लाख लोगों को ऋण देने का लक्ष्य है।
एक दिवसीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में डिजिटल प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अधिकारियों को 'जीविका निधि' के प्रबंधन, इसके डिजिटल एप्लीकेशन प्रणाली, आसान ऋण प्रक्रिया और जमीनी स्तर पर इसके त्वरित क्रियान्वयन की बारीकियों से अवगत कराया गया। अंत में, इस संकल्प को दोहराया गया कि जीविका दीदियाँ अब केवल बदलाव का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे खुद बिहार के ग्रामीण विकास की मुख्य सूत्रधार और नेत्री हैं।
उल्लेखनीय है कि जीविका निधि के स्थापना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को ससमय उचित ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाना, जिससे वे अपनी आवश्यकतानुसार ऋण उत्पादों का सृजन कर सकेंगे। इसके माध्यम से ऋण की उपलब्धता त्वरित एवं ससमय हो सकेगी तथा बैंक के माध्यम से उपलब्ध होने वाले ऋण में विलंब को दूर किया जा सकेगा।
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