, Aug. 13 -- प्रो. नारायण ने कहा कि युवाओं में अनुशासन, संवेदनशीलता, सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना समय की आवश्यकता है। आपदा मित्र के रूप में प्राप्त प्रशिक्षण इन गुणों को विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने प्रशिक्षित युवाओं से अपने प्रशिक्षण का लाभ आसपास के लोगों तक पहुंचाने तथा आपदा से बचाव के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करने का आह्वान किया।कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीजी एथलीट्स के अध्यक्ष डॉ. प्रियंका राय ने कहा कि प्रशिक्षित युवा आपदा के समय प्रथम रिस्पांडर के रूप में समाज हित में अपने व्यावहारिक ज्ञान का सदुपयोग करने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में प्राथमिक उपचार, सीपीआर, रक्तचाप एवं अन्य आवश्यक जांच की जानकारी रखने वाले प्रशिक्षित युवा किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।उन्होंने प्रशिक्षित छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण को केवल प्रमाण पत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखें, बल्कि अपने परिवार, गांव, मोहल्ले एवं समाज के लोगों को भी आपदाओं से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवा समाज में जागरूकता का संदेशवाहक बनकर आपदा जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

प्रशिक्षण के छठे दिन प्रशिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को अलग-अलग समूहों में बांटकर सीपीआर देने की स्थिति, विधि एवं उसके महत्व की विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही रक्तचाप की जांच करने के तरीके एवं उसके महत्व से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। हृदय गति, ऑक्सीजन स्तर एवं पल्स रेट आदि की जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

इस दौरान भूकंप, अगलगी, वज्रपात एवं सड़क दुर्घटना जैसी आपदाओं की स्थिति में बचाव एवं राहत कार्यों को लेकर विश्वविद्यालय के मैदान में मॉक ड्रिल का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को आपदा के दौरान सुरक्षित तरीके से लोगों को बाहर निकालने, प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने तथा संबंधित एजेंसियों को सूचना देने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया।

इसके बाद एम्बुलेंस, अग्निशमन यंत्र एवं फर्स्ट एड बॉक्स आदि के संबंध में प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने इनके उपयोग की विधि का प्रदर्शन कर छात्र-छात्राओं से भी अभ्यास कराया।

प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत डॉ. शबनम कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आर.एन. चौरसिया ने किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित