, May 2 -- समाजसेवी बैद्यनाथ यादव ने सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार के इस निर्णय से वर्षो से उपेक्षित मैथिली, एक बार फिर से उपेक्षा की शिकार हुई जान पड़ती है और इसके लिए सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों को एक प्लेटफार्म पर आकर अपनी मातृभाषा की अस्मिता की रक्षा के लिए आवाज बुलंद किया जाना समय की मांग है।

शिक्षाविद हीरा कुमार झा ने सीबीएसई की ओर से थमिक कक्षाओं में वैकल्पिक भाषा के रूप में मैथिली को शामिल किए जाने का स्वागत करते हुए आम लोगों से अपने बच्चों को अपने मां की भाषा को अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील करते हुए सरकार द्वारा जनगणना में मातृभाषा के कालम में मैथिली को शामिल नहीं किए जाने संबंधी दोष का जल्द से जल्द निवारण करने की बात रखी।

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