, May 22 -- राज्य सरकार का मानना है कि इन ऐतिहासिक चीनी मिलों के पुनरुद्धार से मिथिलांचल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गन्ना किसानों को बेहतर बाजार एवं आर्थिक मजबूती प्राप्त होगी। चनपटिया चीनी मिल से संबंधित मामला वर्तमान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। राज्य सरकार इस मामले के त्वरित निष्पादन के लिए लगातार प्रयासरत है। मुख्य सचिव, बिहार द्वारा भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय को आवश्यक कार्रवाई के लिये अनुरोध किया गया था, जिसके आलोक में कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। वहीं राज्य सरकार को चीनी मिल की भूमि एवं परिसंपत्तियों को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिये प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। इसके अनुपालन में जिला पदाधिकारी, पश्चिम चंपारण को परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये निर्देशित किया गया है।

बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल का मामला एनसीएलटी, कोलकाता बेंच में परिसमापन प्रक्रिया में है। इस मिल के पुनः संचालन हेतु विभिन्न निवेशकों द्वारा प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिस पर गन्ना उद्योग विभाग द्वारा सकारात्मक सहमति प्रदान की गई है। इसी प्रकार, बारा चकिया चीनी मिल, जो पूर्व में ब्रिटिश इंडिया कॉर्पोरेशन समूह की इकाई थी, वर्ष 1994-95 से बंद है। इस मिल से संबंधित मामला वर्तमान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद राज्य सरकार पुनरुद्धार की दिशा में लगातार प्रयासरत है।

राज्य सरकार द्वारा बिहार में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके लिए मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, समस्तीपुर, गया, शिवहर, सीवान, रोहतास, मोतिहारी, पश्चिम चंपारण, पटना, पूर्णिया, वैशाली, सारण, नवादा, बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, जमुई, भागलपुर, नालंदा, बांका, मधेपुरा, मधुबनी एवं दरभंगा सहित विभिन्न जिलों में उपयुक्त भूमि चिन्हित करने के लिये संबंधित जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। नवादा, पूर्वी चंपारण एवं सारण जिलों से प्रारंभिक प्रतिवेदन प्राप्त हो चुके हैं तथा अन्य जिलों से भी रिपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। विभाग द्वारा संभावित निवेशकों को स्थल निरीक्षण भी कराया जा रहा है।

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