, Aug. 4 -- बैठक में यह बात सामने आई कि ग्रामीण हाटों के निर्माण के लिए सबसे पहले नालंदा जिले से प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। मंत्री ने पदाधिकारियों को इस पर तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए और अन्य जिलों से प्रस्ताव ना मिलने भी समीक्षा करने कहा। उन्होंने कहा कि इन हाटों के निर्माण से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से जीविका दीदियों को अपने उत्पादों के लिए तैयार बाजार मिलेगा, जिससे सकल घरेलू उत्पाद में भी योगदान बढ़ेगा।
मंत्री ने कहा कि जीविका दीदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इस दिशा में बकरी पालन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसमें जमुनापारी नस्ल की बकरी पालन को बढ़ावा देना शामिल है। यह नस्ल अच्छी मात्रा में दूध देती है और इसका मांस भी काफी लोकप्रिय है। पश्चिम चंपारण क्षेत्र में इसकी काफी मांग है। उन्होंने कहा कि बकरी पालन को रोजगार के रूप में स्थापित करने के लिए चंपारण से लेकर बांका, जमुई, मुंगेर, शेखपुरा, नवादा, नालंदा, गया, औरंगाबाद और कैमूर आदि जिलों में प्रोडक्शन ग्रुप बनाकर महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा।
मंत्री श्री श्रवण कुमार ने बैठक में विशेष रूप से कहा कि चंपारण के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले थारू आदिवासी समाज के लोगों को इसमें प्राथमिकता दी जाए।उन्होंने कहा कि बकरी के दूध को गाय और भैंस के दूध की तरह आसानी से उपलब्ध कराने के लिए इसकी प्रोसेसिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। चंपारण मीट की मांग और लोकप्रियता को देखते हुए उन्नत स्तर की बकरी पालन योजना को समूह आधारित रूप में चलाया जाएगा। बकरी का दूध पौष्टिक होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला भी है।
मंत्री ने बकरी पालन से लेकर इसके दूध को जरूरतमंदों तक पहुंचाने की योजना को भी तेजी से विस्तार देने के निर्देश दिए। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नाबार्ड एवं पशुपालन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने का भी निर्देश दिया है। बैठक में जीविका दीदियों के स्तर से आंगनबाड़ी केंद्रों और एससी-एसटी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली पोशाकों की सिलाई एवं पर्याप्त आपूर्ति की भी समीक्षा मंत्री ने की।
इस दौरान ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा, मंत्री के आप्त सचिव सुनील कुमार, अपर मनरेगा आयुक्त संजय सिंह, विनय कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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