, April 10 -- इस दिशा में यूटिलिटी शिफ्टिंग, भूमि की पर्याप्त उपलब्धता, विभिन्न संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) और वन विभाग की पूर्व-स्वीकृति जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों का समुचित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।साथ ही गुणवत्ता और तकनीकी उत्कृष्टता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है। योजनाओं के प्रभावी और त्रुटिहीन क्रियान्वयन के लिए विभागीय अभियंताओं और अधिकारियों द्वारा आवश्यकतानुसार स्थलीय निरीक्षण एवं तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। इस जमीनी अनुश्रवण का सीधा उद्देश्य परियोजनाओं की गुणवत्ता एवं पूर्ण व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) को सुनिश्चित करना है, जिससे भविष्य में उच्च स्तरीय और टिकाऊ सड़कों का निर्माण हो सके।

ग्रामीण कार्य विभाग का यह कदम राज्य के अंतिम बसावट तक दीर्घकालिक एवं निर्बाध ग्रामीण सड़क सम्पर्कता उपलब्ध कराने की सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।

सात निश्चय-3 के अंतर्गत ग्रामीण अधोसंरचना के इस व्यापक सुदृढ़ीकरण से केवल आवागमन ही सुगम नहीं होगा, बल्कि निर्बाध यातायात के कारण आमजनों को सुलभता होगी और बिहार की संपूर्ण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।

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