, June 25 -- राज्य सरकार नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए गन्ना उद्योग विभाग अथवा बिहार राज्य चीनी निगम की उपलब्ध भूमि पर 1 रुपये की टोकन राशि पर 30 वर्षों की लीज के लिए 40 एकड़ तक भूमि उपलब्ध कराएगी। साथ ही भूमि खरीद पर देय निबंधन शुल्क एवं स्टाम्प शुल्क की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति तथा उत्पादित चीनी पर पाँच वर्षों तक एसजीएसटी की पूर्ण प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की गई है।कार्यरत चीनी मिलों के आधुनिकीकरण, अपग्रेडेशन तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रिफाइनरी में रूपांतरण के लिए पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत अथवा अधिकतम 05 करोड़ रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त डिस्टीलरी एवं इथेनॉल इकाइयों की स्थापना एवं क्षमता विस्तार के लिए प्लांट एवं मशीनरी निवेश पर 15 प्रतिशत अथवा अधिकतम 05 करोड़ रुपये की सहायता, ऋण पर ब्याज अनुदान तथा उत्पादित इथेनॉल पर एसजीएसटी की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी।
सह-विद्युत उत्पादन परियोजनाओं तथा कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों को भी नीति के तहत विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे राज्य में हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 के अंतर्गत बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार के साथ-साथ 25 नई चीनी मिलों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया है। बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा बिहार एक बार फिर देश के अग्रणी गन्ना एवं चीनी उत्पादक राज्यों में अपनी ऐतिहासिक पहचान को सशक्त रूप से स्थापित करेगा।
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