, July 10 -- इस परियोजना के तहत केवल सिलेबस का ड्राफ्ट ही तैयार नहीं होगा, बल्कि एनआईटीटीटीआर, भोपाल के विशेषज्ञ बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों के शिक्षकों को ऑफलाइन मोड में विशेष प्रशिक्षण और कार्यशालाएं (ट्रेनिंग-कम-वर्कशॉप) भी देंगे। इसके लिए दोनों संस्थानों के स्तर पर प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर और कोर्स-वार फैकल्टी नामित किए जा रहे हैं। साथ ही, नया पाठ्यक्रम तैयार करने से पहले उद्योगों के विशेषज्ञों, मौजूदा शिक्षकों और पूर्व छात्रों से बाकायदा फीडबैक फॉर्म और प्रश्नावली के जरिए राय भी ली जाएगी, जिससे सिलेबस पूरी तरह रोजगारपरक बन सके।विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की मंत्री श्रीमती शीला कुमारी ने कहा कि राज्य के युवाओं को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निर्णय लिया गया है कि एनआईटीटीटीआर, भोपाल के सहयोग से सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों का पाठ्यक्रम आउटकम बेस्ड और इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक बनाया जाएगा। इससे हमारे छात्र एआई, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी जैसी नवीनतम तकनीकों में दक्ष होंगे और उन्हें बेहतर प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे।
मंत्री श्रीमती शीला कुमारी ने कहा कि एनआईटीटीटीआर के विशेषज्ञ हमारे शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगे, जिससे क्लासरूम में पढ़ाई का स्तर राष्ट्रीय संस्थानों के बराबर हो। एनईपी 2020 और एआईसीटीई की नीतियों के अनुरूप यह कदम बिहार के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाई देगा और एनबीए एक्रिडिटेशन में भी मदद करेगा।
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