, June 17 -- पटना, 17 जून बिहार सरकार के एक महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रदेश के 04 विश्वविद्यालयों के 13 महाविद्यालयों में रोजगार परक शिक्षा (एइडीपी) शुरू की जाएगी।

बिहार लोकभवन में आज राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस पर सहमति बनी। साथ ही हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च इन स्किम्स एंड पॉलिसीज (सीआरआईएसपी) के साथ एक महत्वरपूर्ण सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया।

इस संबंध में सीआरआईएसपी के संस्थापक सदस्य आरएस जुलानिया ने कहा कि इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू कर दिया गया है। एईडीपी एक चार वर्षीय स्नातक स्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रम है, जिसमें 75 प्रतिशत अकादमिक ज्ञान और 25 प्रतिशत उद्योग विशिष्ट कौशल को समाहित है। इसकी महत्वपूर्ण विशेषता तृतीय वर्ष में स्टाइपेंड के साथ अनिवार्य अप्रेंटिसशिप है। छात्रों को अप्रेंटिसशिप के दौरान 12 हजार 300 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। इस कार्यक्रम की सबसे आकर्षक विशेषता इसका 'प्री-प्लेसमेंट' स्वरूप है। जिस उद्योग में छात्र अप्रेंटिसशिप पूरा करेंगे, वहीं उन्हें रोजगार का प्राथमिकता प्राप्त अवसर मिल सकेगा। यह 'अर्न व्हाइल यू लर्न' का बेहतरीन मॉडल है।

बैठक में सीआरआईएसपी के बिहार स्टेट लीड वैद्यनाथ यादव ने कार्यक्रम की तकनीकी एवं शैक्षणिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के बोर्ड ऑफ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ छात्रों के स्टाइपेंड सुनिश्चित करने के लिए समझौता ज्ञापन भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि जिन विश्वविद्यालयों में कोर्स की शुरुआत हो रही है, उसमें पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के अलावा मुजफ्फरपुर के बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, भागलपुर स्थित तिलका मांझी विश्वविद्यालय और दरभंगा के मिथिला विश्वविद्यालय के चुनिंदा 13 कॉलेजों में कुछ विशेष तरह के कोर्सों की शुरुआत की जाएगी।

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