पटना , जुलाई 15 -- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य में प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 16 जुलाई से पटना के 150 सरकारी स्कूलों में स्कूल 'लाइव क्लासेस कार्यक्रम' शुरू किया जाएगा।
श्री चौधरी ने इस पहल को "बिहार के लिए एक नए युग की ओर एक और ऐतिहासिक कदम" बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर कक्षाओं में पढ़ाई की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार एक नए युग की ओर एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ा रहा है। बिहार स्कूल लाइव क्लासेस के विस्तार के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से समर्थित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को, उसकी पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, सर्वोत्तम शिक्षण संसाधन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल सके।"श्री चौधरी ने बताया कि इस पहल के तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को लाइव इंटरैक्टिव कक्षाएं, एआई आधारित शिक्षण सहायता, स्मार्ट डिजिटल अध्ययन सामग्री, स्टडी नोट्स, मॉक टेस्ट तथा जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह कार्यक्रम पटना के 150 सरकारी स्कूलों में शुरू होगा और जुलाई के अंत तक इसे जिले के सभी 422 सरकारी उच्च विद्यालयों तक विस्तारित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को और सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार पटना के 10 मॉडल स्कूलों में निःशुल्क जेईई और नीट कोचिंग भी शुरू करेगी। बाद में इस योजना का विस्तार राज्य के 146 मॉडल स्कूलों तक किया जाएगा, जिससे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी बिना आर्थिक बोझ के इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।
श्री चौधरी ने राज्य में खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि शास्त्रीनगर स्थित बालिका हॉकी प्रशिक्षण केंद्र को आधुनिक खेल उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा तथा युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एस्ट्रोटर्फ के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी निर्णय राज्य सरकार के सार्वजनिक शिक्षा के आधुनिकीकरण, डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा देने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मजबूत करने और पूरे बिहार में खेल अवसंरचना के विकास के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं।
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