, Oct. 28 -- समन्वयक-गवर्नेंस एवं नॉलेज मैनेजमेंट, श्रीमती महुआ रॉय चौधरी के संचालन में आयोजित परिचर्चा में वन बिलियन लाइव्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बिजित रॉय, मोबाइल क्रेचेज की सुश्री सोनल सिन्हा, ट्रस्टबी के संस्थापक शुभम कुमार तथा जीविका के स्वास्थ्य एवं पोषण विषय के राज्य परियोजना प्रबंधक अप्पोलेनारियस पुर्ती ने भाग लिया। परिचर्चा में देखभाल सेवाओं के व्यावहारिक मॉडल, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और सेवाओं को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।दिन के दूसरे सत्र में आयोजित नवाचार आधारित उद्यमों की परामर्श कार्यशाला में जीविका के राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभवों और पहलों को प्रस्तुत किया। इस सत्र का संचालन डेलॉइट के एसोसिएट डायरेक्टर मौनिक लाहिड़ी ने किया।

इसके बाद "कचरे से संपदा: महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण ऊर्जा तंत्र के रूप में बायोगैस" विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें एकेएफ की मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुश्री टिन्नी साहनी, सिस्टम बायो के क्षेत्रीय प्रबंधक ऋषभ, सस्टेन प्लस एनर्जी फाउंडेशन के रिलेशनशिप मैनेजर प्रशांत कुमार सिंह, एग्रोविन एग्री सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक उमा शंकर कुमार तथा बरौनी डेयरी के उप प्रबंधक कुमार अंबुज ने भाग लिया। परिचर्चा में बायोगैस, जैविक अपशिष्ट के उपयोग और ग्रामीण ऊर्जा आधारित उद्यमों की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के अंतिम तकनीकी सत्र में "सूर्य के प्रकाश से सतत् आय: महिला-नेतृत्व वाले सौर सिंचाई उद्यमों का निर्माण" विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई। इसमें इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई), भारत के उप देशीय प्रतिनिधि शिल्प वर्मा, आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम, इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक जय प्रकाश सिंह, सस्टेन प्लस एनर्जी फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह तथा सिस्टम बायो के क्षेत्रीय प्रबंधक ऋषभ ने भाग लिया।

इस सत्र में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व में उद्यम विकास तथा कृषि और ऊर्जा के बीच समन्वय की संभावनाओं पर विचार किया गया।

कार्यशाला ने बिहार में देखभाल सेवाओं को आजीविका से जोड़ने, सामुदायिक सहयोग को मजबूत करने और महिला-नेतृत्व वाले नवाचार आधारित उद्यमों के विकास पर बहुआयामी संवाद का अवसर प्रदान किया। ऐसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए नए कौशल और रोजगार के अवसर विकसित करने तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने की दिशा में उपयोगी हो सकते हैं। कार्यक्रम में प्रस्तुत अनुभवों और विचारों से देखभाल सेवाओं, ग्रामीण ऊर्जा तथा सौर सिंचाई जैसे क्षेत्रों में संभावित साझेदारियों से विस्तार के नए रास्तों की पहचान की जा सकती है।

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